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जिंदगी ……
ए जिनदगी क्या है?
खुबसूरत सहेली है,
समझो तो सही है,
नहीं तो एक पहेली है.
देखो तो रंगोंसे भरी है,
नहीं तो बेरंग अँधेरी है;
जानो तो खुशबुसे मेहेकी है,
मानो तो बेहेकी बेहेकी है.
कभी ए मज़ा है,
नहीं तो लंबी सजा है,
और कभी सिर्फ अपनीही नहीं,
किसी और के भी जीनेकी वजह है.
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ए रिमझिम बरसता सावन
कुछ याद दिलाता है,
कभी होटोंपे मुस्कान
कभी आँखे नम कर जाता है,
कभी दिलकी धड़कन तेज
कभी स्तब्द कर जाता है,
कभी खुशीका एहेसास
तो कभी गम की लहर लाता है,
पर ए जीनेकी तमन्ना
हर बार जगाता है,
ए रिमझिम बरसता सावन
कुछ याद दिलाता है!
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तमन्ना है फुलसा मेहेकनेकी,
खुशबु बन बेहेकनेकी!
तमन्ना है क्षितज को छुनेकी,
ऊँचे आसमान में उड़नेकी!
तमन्ना है बरीशमे भीगनेकि,
बरसते बुन्दोंको चुमनेकी!
तमन्ना है वादियोंमे घुमनेकी,
बहेते हवावोंसंग झुमनेकी!
तमन्ना है ख्वाबोंमे किसीके डुबनेकी,
प्रेम के रंग में रंग जानेकी……..
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आज फिर….
झांक रहाथा चाँद मेरी खिडकीसे आज फिर,
आज फिर उठा समंदर-ए-तूफ़ान…
सैलाब-ए-दर्द उमड्पडा आज फिर,
आज फिर तेरी याद मुझे सताने लगी…
एहेसास-ए-दिल जाग उठा आज फिर,
आज फिर हो गयी मेरी आँखे नम…
सो नहीं पाऊँगी मैं रात भर आज फिर,
आज फिर सीनेमे चुभनसी होने लगी…
तनहाई ने घेरा है इस नाचिजको आज फिर,
आज फिर कमी तेरी मुझे मेहेसूस होने लगी……..
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उफ्फ़ ये झीलका किनारा,
कितना सुन्दर है ये नज़ारा!
शांत है ये शाम का मंजर,
लग रहा है सबकुछ कितना सुन्दर!
रंगीन पत्ते थमे है पनिपे,
होता है गुमा हमें इस रुमानीपे!
चमक रहे है सितारें, चाँद भी है मुस्कुरा रहा,
जाने ओ मुझे किसकी याद दिलारहा!
दिलमे हो रही है हलकीसी हलचल,
है बहोत गहेरी ये खयालोंकी दलदल!
आंखोमें सपने है, दिलमे उमंग..
बस एकही शिकायत है, ओ नहीं है संग……
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